सम्वेद्ना - Samvedna

किसी गली मे हमने एक मकान देखा
रहते लोग कई उसमे, हर किसी को एक दूसरे से अन्जान देखा

मानते हैं वो खुशियाँ साथ मे कभी कभी
पर गम मे उस घर को हमने सुनसान देखा

ना सम्वेद्नाओ की गूँज है कहीं उनमे
ना एक-दूसरे के दर्द से पहचान देखा

हर कोई मशरूफ है अपनी जिंदगी की उलझानो में
हमने इन्ही उलझानो मे हर किसी को परेशान देखा

है नही वक़्त उनको की देखें वो औरो को भी
हर किसी को बस अपनी जिंदगी मे हैरान देखा

किसी गली मे हमने एक मकान देखा
रहते लोग कई उसमे, हर किसी को एक दूसरे से अन्जान देखा

कभी बस्ती ये भी थी प्यार करने वालो की
एक-दूसरे से मिल-जुल के रहने वालो की
पर आज हमने इसे बियावान देखा

तो क्या कहेंगे आप उस गली को
जिसमे हमने ये मकान देखा

हमको तो लगती है ये मुर्दों की बस्ती है
और हमने यहाँ बस शमशान देखा
       
                           -- Anynoymous

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