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Showing posts from March, 2012

Raat Yo Kahne Laga Mujse Gagan ka Chaand - By Ramdhari Singh Dinkar

रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव है । उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है ।