Skip to main content

High Level Safety Review Committee

Railway ministry constituted High Level Safety Review Committee under chaimanship of Dr. Anil Kakodkar .

Based on the accidents and their consequences witnessed in the recent past, the Committee would examine aspects connected with Signalling Systems, Rolling Stock (of all types), Fixed Structures (Tracks, Bridges and OHE), Human Resource Development with emphasis on Training, Education and Research, Need for a Third Party Audit, Organisational and structural changes in RDSO and in any other department, and improvements in procedural system and improvement in procedures and systems and any other item/modification which Committee may desire.

The Committee would lay down the road map on safety related issues which need to be addressed in the short term and the long term and would give recommendations which would have a significant bearing on further improvement in the systems and protocols. 

Comments

Popular posts from this blog

कर्ण और कृष्ण का संवाद - रामधारी सिंह 'दिनकर'

Following is excerpt from poem Rashmirathi written by Ram dhari singh dinkar. Karna reply to Krishna when he told story of his birth and ask him to join pandava side. सुन-सुन कर कर्ण अधीर हुआ, क्षण एक तनिक गंभीर हुआ,  फिर कहा "बड़ी यह माया है, जो कुछ आपने बताया है  दिनमणि से सुनकर वही कथा मैं भोग चुका हूँ ग्लानि व्यथा  मैं ध्यान जन्म का धरता हूँ, उन्मन यह सोचा करता हूँ,  कैसी होगी वह माँ कराल, निज तन से जो शिशु को निकाल  धाराओं में धर आती है, अथवा जीवित दफनाती है?  सेवती मास दस तक जिसको, पालती उदर में रख जिसको,  जीवन का अंश खिलाती है, अन्तर का रुधिर पिलाती है  आती फिर उसको फ़ेंक कहीं, नागिन होगी वह नारि नहीं  हे कृष्ण आप चुप ही रहिये, इस पर न अधिक कुछ भी कहिये  सुनना न चाहते तनिक श्रवण, जिस माँ ने मेरा किया जनन  वह नहीं नारि कुल्पाली थी, सर्पिणी परम विकराली थी  पत्थर समान उसका हिय था, सुत से समाज बढ़ कर प्रिय था  गोदी में आग लगा कर के, मेरा कुल-वंश छिपा कर के  दुश्मन का उसने काम किया, माताओं को बदनाम किया  माँ का पय भी न पीया मैंने, उलटे अभिशाप लिया मैंने  वह तो यशस्विनी बनी रह

एक पुलिसवाले की व्यथा

लोग अक्सर कहते हैं कि पुलिस सही तरीके से क्राइम कंट्रोल नहीं करती है लेकिन पुलिस करे तो करे क्या। उग्र भीड़ को क्राइम कंट्रोल करने पर आधारित एक लघु कथा। उन्मादी भीड़ हाथों में नंगी तलवारें, लाठी, डंडे लिए पागलों की तरह पुलिस वालों को पत्थर मार मार कर खदेड़ रही थी। उसकी पुलिस भीड़ से अपना असलाह और खुद को बचाते हुए पीछे हट रही थी। थानेदार का सर बुरी तरह फूट गया दो सिपाही उसे सँभालते हुए पीछे हट रहे थे बड़े अफसर, एस डी ऍम, सब मौके से गायब थे। ऑर्रडर देने वाला कोई दूर दूर तक नहीं था। भीड़ हावी होती जा रही थी। सब को कहीं न कही चोट लगी थी।भीड़ को लाठी डंडो से काबू करने के हालात तो बिलकुल भी नहीं थे। सबकी जान पर बनी हुई थी परंतु हाथ में लोड राइफल होते हुए भी जवान गोली चलाने से बच रहे थे, कैसी कायर स्तिथि थी। अचानक हवलदार बुधना को भीड़ ने पकड़ लिया और एक आदमी ने बुधना के सर पर कैरोसिन की गैलन उंडेल दी और दूसरे ने माचिस निकाली ही थी की धाँय की आवाज हुई और माचिस वाला जमीं पर लुढकने लगा।दूसरी आवाज में तेल के गैलन वाला जमीं पर कला बाजी खा रहा था । भीड़ जहां थी वहीँ थम गयी और उलटे पावँ भागने लगी लेकिन......अ

Scheme for creation of National Optical Fiber Network for Broadband connectivity of Panchayats

The Union Cabinet recently approved a scheme for creation of a National Optical Fiber Network (NOFN) for providing Broadband connectivity to Panchayats. The objective of the scheme is to extend the existing optical fiber network which is available up to district / block HQ’s level to the Gram Panchayat level initially by utilizing the Universal Service Obligation Fund (USOF). The cost of this initial phase of the NOFN scheme is likely to be about Rs.20,000 crore. A similar amount of investment is likely to be made by the private sector complementing the NOFN infrastructure while providing services to individual users. In economic terms, the benefits from the scheme are expected through additional employment, e-education, e-health, e-agriculture etc. and reduction in migration of rural population to urban areas. As per a study conducted by the World Bank, with every 10% increase in broadband penetration, there is an increase in GDP growth by 1.4%. NOFN will also facilitate implemen

Arnesh Kumar Judgement regarding arrest

Supreme Court on 2nd July ,2014 in Arnesh kumar vs State of Bihar(CRIMINAL APPEAL NO. 1277 OF 2014) gave following judgement regarding arrest in cases having punishment upto 7 years . In order to ensure that police officers do not arrest accused unnecessarily and Magistrate do not authorise detention casually and mechanically. In order to ensure court gave the following directions: (1) All the State Governments to instruct its police officers not to automatically arrest when a case under Section 498-A of the IPC is registered but to satisfy themselves about the necessity for arrest under the parameters laid down above flowing from Section 41, Cr.PC; (2) All police officers be provided with a check list containing specified sub-clauses under Section 41(1)(b)(ii);  (3) The police officer shall forward the check list duly filed and furnish the reasons and materials which necessitated the arrest, while forwarding/producing the accused before the Magistrate for further detention; 

Matribhumi - A Poem by Sohan Lal Dwivedi

Sometimes patriot poems becomes very attractive and fill you with a unique kind of joy , This poem Matribhumi by Sohan Lal Dwivedi ji is one of such poems , read it and enjoy it :) मातृभूमि ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है, नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है। गंगा यमुन त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं, जगमग छटा निराली पग पग छहर रही है। वह पुण्य भूमि मेरी, वह स्वर्ण भूमि मेरी। वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी। झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में, चिड़िया चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में। अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है, बहती मलय पवन है, तन मन सँवारती है। वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी। वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी। जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता, श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता। गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया, जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया। वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी। वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।         - Sohan Lal Dwivedi